Wednesday, December 26, 2018

الحرب في سوريا: سحب القوات الأمريكية يثير انتقادات داخل الولايات المتحدة وخارجها

أثار قرار إدارة الرئيس الأمريكي، دونالد ترامب، سحب قواتها من سوريا انتقادات على نطاق واسع، سواء داخل الولايات المتحدة أو خارجها.
جاء هذا بعدما قال ترامب إن تنظيم الدولة الإسلامية قد "هُزم".
وأعلنت وزارة الدفاع الأمريكية (البنتاغون) أنها تنتقل إلى "المرحلة التالية من الحملة العسكرية"، لكنها لم تذكر تفاصيل.
وساهم 2000 جندي أمريكي في الحرب ضد تنظيم الدولة وطرده من جزء كبير من شمال شرق سوريا، لكن مازالت هناك جيوب بها مقاتلون تابعون له.
وكان يعتقد سابقا أن المسؤولين العسكريين الأمريكيين أرادوا الحفاظ على وجود عسكري أمريكي في سوريا لضمان عدم تمكن تنظيم الدولة من إعاة بناء قدراته مرة أخرى.
وأعلن البيت الأبيض وكذلك البنتاغون أن الولايات المتحدة بدأت في "إعادة القوات الأمريكية إلى الوطن مع انتقالنا إلى المرحلة التالية من هذه الحملة".
وقالت وزارة الدفاع إنها لن تقدم مزيدا من التفاصيل عن المرحلة التالية "لحماية القوات ولأسباب تتعلق بأمن العمليات".
وأوضح البيت الأبيض أن الولايات المتحدة وحلفاءها "مستعدون للتدخل مرة أخرى على جميع المستويات للدفاع عن المصالح الأمريكية كلما دعت الضرورة. وسنواصل العمل معا لحرمان الإرهابيين الإسلاميين المتطرفين من الأراضي والتمويل والدعم وأي وسيلة لاختراق حدودنا".
يعد سحب القوات الأمريكية من سوريا وعدا قطعه الرئيس ترامب منذ فترة طويلة.
لكن الإعلان عنه ربما كان مفاجأة لبعض المسؤولين الأمريكيين.
ففي الأسبوع الماضي، قال المبعوث الرئاسي الخاص للتحالف الدولي لهزيمة تنظيم الدولة، بريت مكغورك، للصحفيين في وزارة الخارجية الأمريكية "لا أحد يقول إن مقاتلي تنظيم الدولة سوف يختفون. لا أحد بهذه السذاجة. لذلك نريد البقاء على الأرض والتأكد من الحفاظ على الاستقرار في هذه المناطق".
وألغت وزارة الخارجية الأمريكية بشكل مفاجئ الإحاطة الصحفية اليومية يوم الأربعاء بعد إعلان الانسحاب.
وانتقد القرار عضو مجلس الشيوخ الجمهوري ليندسي غراهام، وهو أحد أنصار ترامب وعضو لجنة الخدمات المسلحة، ووصفه بأنه "خطأ جم (مثل أخطاء الرئيس السابق باراك) أوباما".
وفي سلسلة تغريدات بموقع تويتر، قال غراهام إن تنظيم الدولة "لم يُهزم"، وحذر من أن سحب القوات الأمريكية يضع "المتحالفين معنا من الأكراد في خطر".
بدوره، انتقد السناتور الجمهوري بوب كوركر، رئيس لجنة العلاقات الخارجية، بمجلس الشيوخ قرار الانسحاب بوصفه "فظيع".
وقال كوركر إن الأعضاء الجمهوريين بمجلس الشيوخ صدموا ويشعرون بالحزن لأن ترامب سيجعل حلفاءه العرب والأكراد تحت رحمة الرئيس السوري بشار الأسد وتركيا.
ومنذ نحو أسبوع، أعلنت تركيا أنها تستعد لشن عملية عسكرية ضد فصائل مسلحة كردية في شمال شرقي سوريا. وشكل الأكراد حليفا هاما للولايات المتحدة في حربها ضد تنظيم الدولة.
وقال ترامب إن الوقت قد حان لإعادة الجنود إلى الوطن بعد ما وصفه بـ"انتصاراتهم التاريخية".
من جهتها، قالت المتحدثة باسم وزارة الخارجية الروسية، ماريا زخاروفا، عبر محطة "وان تي في" التي تسيطر عليها الدولة، إن "القرار الأمريكي قد يؤدي إلى آفاق حقيقية وصادقة لتسوية سياسية" في سوريا.
وفي بريطانيا، قال متحدث باسم الحكومة في بيان إن هذه التطورات "لا تشير إلى نهاية التحالف الدولي أو حملته ضد تنظيم الدولة الإسلامية"، وأن المملكة المتحدة ستبقى "ملتزمة" بضمان "الهزيمة التامة" للتنظيم.
وأضاف البيان البريطاني أنه "ما زال هناك الكثير الذي يتعين القيام به ويجب ألا نهمل التهديد الذي يمثلونه".
أما إسرائيل، فقالت إنها أُبلغت بأن لدى الولايات المتحدة "طرقا أخرى للتأثير في المنطقة"، ولكن سوف "ندرس الجدول الزمني للانسحاب، وكيف سيتم ذلك، وبالطبع الآثار المترتبة علينا".

Monday, November 5, 2018

विराट कोहली हुए 30 साल के, हरिद्वार में अनुष्का शर्मा के साथ इस अंदाज में किया सेलिब्रेट

डियन क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) 30 साल के हो चुके हैं. विराट कोहली ने अपना जन्मदिन पत्नी अनुष्का शर्मा (  विराट और अनुष्का इन तस्वीरों में मुस्कुराते नजर आ रहे हैं. विराट ने सफेद कुर्ता पायजामा के साथ शॉल ओढ़ रखी है. जबकि अनुष्का शर्मा काले रंग के कपड़े में देखी जा सकती हैं. अनुष्का कैप्शन में भगवान को विराट कोहली के जन्म के लिए धन्यवाद दे रही हैं.) के साथ बिल्कुल सादगी से सेलिब्रेट किया. अनुष्का ने पति का जन्मदिन हरिद्वार के आश्रम में मनाया. इसकी तस्वीर एक्ट्रेस ने ट्विटर पर जारी की है. अनुष्का ने दो तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसमें वह विराट कोहली को गले लगाती दिख रही हैं. बता दें, विराट कोहली का जन्म 5 नवंबर, 1988 को दिल्ली में हुआ था.बता दें, विराट और अनुष्का

 की शादी इटली में पिछले साल 11 दिसंबर को भारतीय रीति-रिवाजों के साथ हुई थी. हल्दी, मेंहदी, फेरे से लेकर रिसेप्शन तक जोड़े ने जाने-माने डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी के डिजाइन किए हुए आउटफिट पहने थे. इटली में गुपचुप शादी के बाद नई दिल्ली में 21 दिसंबर और मुंबई में 26 दिसंबर को विरुष्का की ग्रैंड रिसेप्शन पार्टी रखी गई थी. इसमें पीएम मोदी से लेकर बी-टाउन और कई स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी मौजूद थे.आमिर खान (  ) अपने तीन दशक पुराने बॉलीवुड करियर में पहली बार बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के साथ फिल्म 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तां ( Of  )' में स्क्रीन शेयर करने जा रहे हैं. फिल्म इंडस्ट्री के हर सितारे की एक चाहत होती है कि उन्हें करियर में एक न एक बार मिस्टर बच्चन के साथ फिल्म करने का मौका मिले. आमिर खान की यह चाहत फिल्म 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तां' के साथ पूरी होने जा रही है. करण जौहर के टॉक शो 'कॉफी विद करण' में आमिर खान ने बिग बी के साथ हुई पहली 

बातचीत का जिक्र किया. आमिर ने बताया कि जैसी ही उन्हें होटल की रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि अमिताभ बच्चन का फोन आया है तो उन्हें लगा कोई उनके साथ मजाक कर रहा आमिर खा करण जौहर ने कहा कि जैसे ही उनके फोन पर 'अमित अंकल कॉलिंग' लिखा आता है, वैसे ही वह खड़े हो जाते हैं. और अपनी कर्सी से उठकर ही उनसे बात करते हैं. न उस वक्त ऊटी में फिल्म 'जो जीता वही सिकंदर' की शूटिंग कर रहे थे जब उनकी होटल के लैंडलाइन में बिग बी का फोन आया. पहली बार आमिर को लगा कोई मजाक कर रहा है, लेकिन दूसरी बार फोन आने पर जैसे ही आमिर ने आवाज सुनी तो वह तुरंत बिग बी को पहचान गए. आमिर बताते हैं कि बिग बी ने उन्हें लंदन में होने वाले एक कॉन्सर्ट के सिलसिले में फोन किया था. बिग बी जो कुछ भी कह रहे थे, जवाब में आमिर के मुंह से सिर्फ और सिर्फ 'यस सर' निकल रहा था. आमिर मजाक में कहते हैं कि अगर वो मुझसे यह पूछते कि ऊटी का मौसम कैसा हो रहा है? तब भी मैं सिर्फ और सिर्फ 'यस सर' कह पाता.  आमिर यहां अपनी दीवाली पर रिलीज होने वाली फिल्म 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तां' को प्रमोट करने आए. यशराज बैनर की इस फिल्म में आमिर के साथ पहली बार बी-टाउन के शहंशाह अमिताभ बच्चन नजर आएंगे.

Monday, October 15, 2018

'पाकिस्तान को ज़बान नहीं डंडे का ज़ोर दिखाए भारत'

मार्च 1956 को लागू होने वाले जिस संविधान को मिर्ज़ा साहब ने कूड़ा क़रार दिया था वो संविधान पाकिस्तान की संसद ने उन्हीं के नेतृत्व में तैयार किया था. इस संविधान के तहत पाकिस्तान ग्रेट ब्रिटेन की डोमिनियन से निकल कर एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश की हैसियत से उभरा था और इसी संविधान ने पाकिस्तान को इस्लामी लोकतंत्र घोषित किया था.
लेकिन एक अड़चन ये थी कि इसी संविधान के तहत राष्ट्रपति के पद को प्रधानमंत्री के पद से बेहतर क़रार दिया गया था और इस में 58 (2 बी) क़िस्म की कुछ ऐसी बातें डाली गई थीं कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को किसी भी वक़्त बस यूं ही निकाल बाहर कर सकते थे.
इसकंदर मिर्ज़ा ने शक़ की तलवार का वो इस्तेमाल किया कि उसके मुक़ाबले में 58 (2बी) कुंद छुरी दिखाई देती है.
उन्होंने जिन प्रधानमंत्रियों का शिकार किया ज़रा उनकी फ़ेहरिस्त देखें-
मोहम्मद अली बोगराः 17 अप्रैल से 12 अगस्त 1955. उनका इस्तीफ़ा संविधान लागू होने से पहले लिया गया था.
चौधरी मोहम्मद अलीः 12 अगस्त 1955 से 12 सितंबर 1956
हुसैन शहीद सोहरावर्दीः 12 अक्तूबर 1956 से 17 सितंबर 11957
इब्राहिम इस्माइल चुंद्रीगरः 17 अक्तूबर 1957 से 16 दिसंबर 1957
फ़िरोज़ ख़ान नूनः 16 दिसंबर 1957 से 7 अक्तूबर 1958
पाकिस्तानी प्रधानमंत्रियों की इस म्यूज़िकल चेयर के बारे में भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से जुड़ा ये क़िस्सा दोहराया जाता है कि 'मैं तो इतनी जल्दी धोतियां भी नहीं बदलता जितनी जल्दी पाकिस्तान अपने प्रधानमंत्री बदल लेता है.'
इसकंदर मिर्ज़ा की 'महलाती साज़िशों' की एक झलक एक बार फिर शहाबनामा के पन्नों से देखें,
'इसकंदर मिर्ज़ा को गवर्नर जनरल बने हुए तीन माह हुए थे कि शाम के पांच बजे मुझे घर पर मिस्टर सोहरावर्दी ने टेलीफ़ोन करके पूछा, प्रधानमंत्री के तौर पर मेरी शपथ के लिए कौन-सा दिन तय हुआ है?'
'ये सवाल सुनकर मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ क्योंकि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. यही बात मैंने उन्हें बताई तो मिस्टर सोहरावर्दी ग़ुस्से से बोले, तुम किस तरह के निकम्मे सेक्रेट्री हो? फ़ैसला हो चुका है, अब सिर्फ़ विस्तृत विवरण का इंतज़ार है. फ़ौरन गवर्नर जनरल के पास जाओ और शपथ लेने की तारीख़ और समय पता करके मुझे ख़बर दो, मैं इंतज़ार करूंगा.'
'मजबूरन मैं इसकंदर मिर्ज़ा साहब के पास गया. वो अपने चंद दोस्तों के साथ ब्रिज खेल रहे थे. मौका पाकर मैं उन्हें कमरे से बाहर ले गया और उन्हें मिस्टर सोहरावर्दी वाली बात बताई. ये सुन कर वो ख़ूब हंसे और अंदर जाकर अपने दोस्तों से बोले, तुमने कुछ सुना? सोहरावर्दी प्रधानमंत्री की शपथ लेने का वक़्त पूछ रहा है.'
'इस पर सबने ताश के पत्ते ज़ोर-ज़ोर से मेज़ पर मारे और बड़े ऊंचे फ़रमाइशी क़हक़हे बुलंद किए. कुछ देर अच्छी ख़ासी हुड़दंग जारी रही. इसके बाद गवर्नर जनरल ने मुझे कहा, 'मेरी तरफ़ से तुम्हें इजाज़त है कि तुम सोहरावर्दी को बता दो कि शपथग्रहण का वक़्त परसों के लिए तय हुआ है और चौधरी मोहम्मद अली प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे.'
'वहां से मैं सीधा मिस्टर सोहरावर्दी के यहां पहुंचा और उनको ख़बर सुनाई. ऐसा दिखाई देता था कि उनके साथ कुछ वादे हो चुके थे. उस नए सूरत-ए-हाल पर वो बहुत झल्लाए और मेरे सामने उन्होंने बस इतना कहा- अच्छा फिर वही पड़ोस की साज़िश.'
लेकिन जैसा कि होता आया है, देश के राष्ट्रपति की 'पड़ोस की साज़िशें' ख़ुद उन्हीं पर भारी पड़ गईं. इसकंदर मिर्ज़ा ने न सिर्फ़ सिफ़ारिश करके जूनियर अफ़सर अयूब ख़ान को आर्मी चीफ़ बनवाया था बल्कि मार्शल लॉ से सिर्फ़ तीन महीने पहले उनके कार्यकाल को दो साल के लिए और बढ़ा दिया था.
उन्हीं अयूब ख़ान ने मार्शल लॉ के बीस दिन के अंदर-अंदर इसकंदर मिर्ज़ा को जहाज़ में लदवाकर, अंतरिक्ष में तो नहीं, पहले क्वेटा और फिर ब्रितानिया भेज दिया.
आपने देखा होगा कि ये स्क्रिप्ट भी पाकिस्तान में इतनी चली है कि घिस-पिट गई है. जो जिस आर्मी चीफ़ को लगाता है वही उसके क़दमों तले से क़ालीन खींच लेता है.
पाकिस्तान बनने के बाद लियाक़त अली ख़ान ने उन्हें देश का रक्षामंत्री बनाया. गवर्नर जनरल ग़ुलाम मोहम्मद ने ख़राब सेहत की वजह से इस्तीफ़ा दे दिया तो इसकंदर मिर्ज़ा उनकी जगह गवर्नर जनरल बन गए. इसके बाद जो कुछ भी हुआ वो पाकिस्तान के इतिहास का हिस्सा है.
इतिहास का हिस्सा ये भी है कि सात अक्तूबर को मार्शल लॉ लगाने के बाद इसकंदर मिर्ज़ा को जल्द ही एहसास हो गया कि संविधान को रद्द करके और संसद भंग करके उन्होंने वही डाल काट डाली है जिस पर वो बैठे थे.
इसकंदर मिर्ज़ा के सात अक्तूबर और 27 अक्तूबर के बीच के बीस दिन बड़े व्यस्त गुज़रे. इस दौरान पहले तो उन्होंने सेना के भीतर अय्यूब ख़ान के विरोधी धड़े को शह देकर पहले तो अय्यूब ख़ान का पत्ता साफ़ करने की कोशिश की. जब उसमें नाकामी हुई तो 24 अक्तूबर को अयूब ख़ान को चीफ़ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर के पद से हटा कर प्रधानमंत्री बना डाला.किन अयूब ख़ान को बराबर इसकंदर मिर्ज़ा की 'महलाती साज़िशों' की ख़बर मिलती रही. वो 'फ्रेंड्ज़ नॉट मास्टर्ज़' में लिखते हैं,
'हमें सूचना मिली कि उनकी बीवी (बेग़म नाहीद मिर्ज़ा) उनसे हर वक़्त लड़ती झगड़ती रहती हैं कि जब तुमने एक ग़लती कर ही दी है तो अब अयूब ख़ान का भी सफ़ाया कर दो.'
'मैं उनके पास गया और कहा, आप चाहती क्या हैं? सुना है आप फ़ौजी अफ़सर की गिरफ़्तारी का हुक़्म देती फिर रही हैं?'
उन्होंने कहा, आपको ग़लत ख़बर मिली है.
'मैंने कहा, देखिए ये अय्यारी और चालबाज़ी ख़त्म कीजिए. होशियार रहें, आप आग से खेल रहे हैं. हम सब आपकी वफ़ादारी का दम भरते हैं, फिर आप ऐसी शरारत क्यों कर रहे हैं?'
अयूब ख़ान ने भी भांप लिया था कि अगर संविधान ही नहीं है तो फिर राष्ट्रपति के पद का क्या मतलब है? संविधान की डाल ही नहीं रही तो उस पर राष्ट्रपति पद का घौंसला कैसे रहेगा?
27 अक्तूबर की रात जनरल बर्की, जनरल आज़म और जनरल ख़ालिद शेख़ इसकंदर मिर्ज़ा के घर पहुंच गए. नौकरों ने कहा कि साहब इस समय आराम कर रहे हैं, लेकिन जनरल इतनी आसानी से कहां टलते हैं. उन्होंने गाउन में ही राष्ट्रपति से पहले टाइप किए गए इस्तीफ़े पर दस्तख़त लिए और कहा कि अपना सामान उठा लें, आपको अभी इसी वक़्त राष्ट्रपति निवास से निकलना होगा.
इसकंदर मिर्ज़ा ने अपने ओहदे के बारे में कुछ बहस करने की कोशिश की, लेकिन बेग़म नाहीद एक फिर ज़्यादा समझदार साबित हुईं और उन्होंने सिर्फ़ इतना पूछा, मगर मेरी बिल्लियों का क्या होगा?
इनकी तारीफ़ में सबसे पहले जो बात कही जाती है वो ये है कि इसकंदर मिर्ज़ा मीर जाफ़र के पड़पोते हैं. वही मीर जाफ़र जिन्होंने 1757 में प्लासी की लड़ाई में बंगाल के हुक्मरान सिराजुद्दोला की अंग्रेज़ों के हाथों हार में अहम किरदार अदा किया था और जिनके बारे में अल्लामा इक़बाल कह गए थे-
'जफ़र अज़ बंगाल ओ सादिक़ अज़ दकन
नंग आदम, नंग दी, नंग वतन'
इन्हीं इसकंदर मिर्ज़ा के बेटे हुमायूं मिर्ज़ा ने एक किताब लिखी है, 'फ्रॉम प्लासी टू पाकिस्तान' जिसमें उन्होंने हैरतअंगेज़ तौर पर कुछ और ही कहानी बयान की है.
किताब के लेखक ने सिराजुद्दोला को बदमिज़ाज और बेरहम ठहराते हुए लॉर्ड क्लाइव के हाथों हार का ज़िम्मेदार ख़ुद उन्हें ही क़रार दिया तो दूसरी तरफ़ ये अजीबोग़रीब बात भी ढूंढी कि जिन लोगों ने सिराजुद्दोला को तख़्त पर बिठाया था (उनका मतलब अपने बुज़ुर्ग मीर जाफ़र से है) उन्हीं के साथ इस नौजवान हुक्मरान ने बेवफ़ाई की.
वो आगे चल कर लिखते हैं कि उस लड़ाई से तकरीबन ठीक 200 साल बाद बंगाल का इतिहास कराची में दोहराया गया और मीर जाफ़र के पड़पोते इसकंदर मिर्ज़ा ने जिस अय्यूब ख़ान को परवान चढ़ाया था, उसी ने अपने मोहसिन के सिर से ताज-ए-सदारत नोच लिया.
इसकंदर मिर्ज़ा भारतीय उपमहाद्वीप के ऐसे पहले सैन्य अफ़सर थे जिन्होंने ब्रितानिया के इंपीरियल मिलिट्री कॉलेज से प्रशिक्षण लिया था. लेकिन देश लौटने के बाद उन्होंने सिविल लाइन को तरजीह दी और नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रांत में पॉलिटकल अफ़सर भर्ती हो गए.

Monday, October 8, 2018

COP21之后:如何助力巴黎协议?

当195个国家在去年底巴黎COP21会议上签署一项新的国际气候协议时,全球为之欢欣雀跃。该协议是一个关键的转折点,是世界走向零碳和气候适应的基本支点。但要延续巴黎峰会的势头、保证协议快速生效并得到充分执行,我们仍需采取一些关键的步骤。

本文中,我们就各国为保证巴黎协议执行而必须采取的重要措施有关问题进行回答

1)各国在COP21峰会上达成了巴黎协议,是否意味着协议已经生效?

并非如此,各国仍需采取相应的措施,协议才会生效。
2015年12月12日在 峰会上,联合国气候变化框架公约( )各缔约国只是“通过”了巴黎协议。如此一来,协议的形式和内容得到了正式的确立。

除了通过巴黎协议之外,各缔约国就协议生效的必要条件做出数项关键决定。各方就各国如何敲定其国家气候方案以及如何将国家自主贡献预案( )变为国家确定贡献( 协议正式生效后,将举行巴黎协议缔约国首次会议。在这次重要的会议上将通过许多保证协议有效所必需的详细规则和流程。

3)各国批准协议的时间表如何?

所有国家元首均可在2016年4月22日纽约举行的一场高级别签约仪式上签署协议。在接下来直至2017年4月21日的一年时间里,协议将开放签字。考虑到巴黎协议的重要性以及COP21峰会创造出的政治势头,专业人士预计许多国家都将派代表参加此次高层签约仪式。

虽然在协议上签字表明签约国承诺不会做出可能危害协议目标达成的行动,但签字本身并不意味着一国已经成为了巴黎协议的“缔约方”。如同许多其他国际协议一样,加入巴黎协议是一个两步走的过程:各国必须签署协议,然后还要表明其愿意加入协议并作为协议缔约方受到协议的约束。
)达成了一致。

2)现在该做什么?

广义上讲,各国现在必须加入巴黎协议并成为缔约国。要做到这一点,每个国家都应该签署条约并明确表示他们同意受到协议约束。
只有至少55个UNFCCC缔约国签署巴黎协议并表明愿意接受协议约束,且签约国的温室气体排放量总和在全球温室气体排放总量中所占比重达到55%以上时,协议才能“发生效力”,即生效并具有法律约束力。

Monday, October 1, 2018

चीन की ऐसी 'जेल' जहां बंद हैं दस लाख मुसलमान?

इन दिनों देश के पश्चिमी प्रांत शिनजिंयाग में अल्पसंख्यक मुसलमानों के प्रति अपने रवैये की वजह से चीन की भारी आलोचना हो रही है. आलोचकों का कहना है कि चीन ने इस राज्य में बड़ी संख्या में मुसलमानों को ख़ास तरह के कैंपों में रखा है.
अगस्त में एक संयुक्त राष्ट्र की कमेटी को बताया गया था कि शिनजियांग में क़रीब दस लाख मुसलमानों को एक तरह की हिरासत में रखा गया है, जहां उन्हें 'दोबारा शिक्षा' दी जा रही है.
चीन इन ख़बरों का खंडन करता है. लेकिन इस दौरान शिनजियांग में लोगों पर निगरानी के कई सबूत सामने आए हैं.
आइए समझते हैं कि इस कहानी के अलग-अलग पहलू क्या हैं.
चीन के पश्चिमी प्रांत शिनजियांग में रहने वाले एक करोड़ से अधिक वीगर समुदाय के अधिकतर लोग मुसलमान हैं. ये लोग ख़ुद को सांस्कृतिक नज़र से मध्य एशिया के देशों के क़रीब मानते हैं. उनकी भाषा भी तुर्की से मिलती-जुलती है.
लेकिन हाल के वर्षों में भारी संख्या में चीन के बहुसंख्यक नस्लीय समूह 'हान' चीनियों का शिनजियांग में बसना एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है. वीगर लोगों को लगता है कि अब उनकी रोज़ी-रोटी और संस्कृति ख़तरे में पड़ रही है.
शिनजियांग चीन के पश्चिम में देश का सबसे बड़ा प्रांत है. इसकी सीमाएं भारत, अफ़ग़ानिस्तान और मंगोलिया जैसे कई देशों से मिलती हैं. कहने को तो ये भी तिब्बत की ही तरह एक स्वायत्त क्षेत्र है लेकिन दरअसल यहां की सरकार की डोर बीजिंग के ही हाथ में है.
सदियों से इस प्रांत की अर्थव्यवस्था खेती और व्यापार पर केंद्रित रही है. ऐतिहासिक सिल्क रूट की वजह से यहां ख़ुशहाली रही है.
बीसवीं सदी की शुरुआत में वीगर समुदाय ने थोड़े वक्त के लिए ही सही, शिनजियांग को आज़ाद घोषित कर दिया था. लेकिन 1949 की कम्यूनिस्ट क्रांति के बाद ये प्रांत चीन का हिस्सा बन गया.
अगस्त 2018 में संयुक्त राष्ट्र की एक मानवाधिकार कमेटी को बताया गया था कि 'पूरा वीगर स्वायत्त क्षेत्र नज़रबंदी में है.'
इस कमेटी को बताया गया था कि क़रीब 10 लाख लोग हिरासती ज़िंदगी बिता रहे हैं. ऐसी रिपोर्टों की पुष्टि ह्यूमन राइट्स वॉच भी करता है.
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि एक तरह के हिरासती कैंपों में रखे गए लोगों को चीनी भाषा सिखाई जाती हैं और उन्हें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रति वफ़ादारी की कसम खानी होती है.
साथ ही लोगों से उनके धर्म और संस्कृति की आलोचना करने को कहा जाता है.
ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक वीगर समुदाय को बेहद सख़्त निगरानी का सामना करना पड़ता है. लोगों के घरों के दरवाज़े पर QR कोड्स लगे हुए हैं और चेहरे को पहचानने के लिए कैमरे फ़िट हैं. अधिकारी जब चाहें तब ये पता लगा सकते हैं कि घर अंदर कौन है.
शिनजियांग से सीधी ख़बरें आना बहुत मुश्किल है. वहां मीडिया पर पाबंदी है. लेकिन बीबीसी ने कई बार इस क्षेत्र से रिपोर्ट्स जुटाई हैं और ख़ुद इन कैंपों के सबूत देखे हैं.
बीबीसी के कार्यक्रम न्यूज़नाइट ने कई ऐसे लोगों से भी बात की है जो इन जेलों में रह चुके हैं. ऐसे ही एक शख़्स हैं आमिर.
आमिर ने बीबीसी को बताया - ''वो मुझे सोने नहीं देते थे. मुझे कई घंटों तक लटका कर रखा जाता था. मेरी चमड़ी में सूइयां चुभाई जाती थीं. प्लास से मेरे नाख़ून नोचे जाते थे. टॉर्चर का सारा सामान मेरे सामने टेबल पर रखा जाता था ताकि में ख़ौफ़ज़दा रहूं. मुझे दूसरे लोगों के चीखने की आवाज़ सुनाई देती थी.''
अज़ात नाम के अन्य पूर्व क़ैदी ने बताया - '' जहां मैं क़ैद था, वहां डिनर के वक़्त करीब 1,200 लोग हाथों में प्लास्टिक की कटोरियां लेकर चीन समर्थक गीत गाते थे. वो सब रोबोट की तरह दिखते थे. उनकी तो आत्मा ही मर गई थी. मैं उनमें से कई लोगों को जानता हूं. वो सब ऐसे व्यवहार करते थे कि जैसे कि कार दुर्घटना में अपनी यादाश्त खो चुके हों.''
चीन का कहना है कि उसे अलगाववादी इस्लामी गुटों से ख़तरा है क्योंकि कुछ वीगर लोगों ने इस्लामिक स्टेट समूह के साथ हथियार उठा लिए हैं.
साल 2009 में शिनजियांग की राजधानी ऊरूमची में हुए दंगों में हान समुदाय के 200 लोग मारे गए थे. उसके बाद से यहां हिंसा बढ़ी है. जुलाई 2014 में पुलिस स्टेशन और सरकारी दफ़्तरों पर हुए हमलों में 96 लोग मारे गए थे.
अक्तूबर 2013 में बीजिंग के तियाननमेन स्क्वायर में एक कार भीड़ में घुसी और कई लोगों के कुचल दिया. चीनी प्रशासन ने इसके लिए भी शिनजियांग के अलगाववादियों को ज़िम्मेदार बताया गया था.
सरकार की ताज़ा कार्रवाई के पीछे फ़रवरी 2017 में शिनजियांग के ऊरूमची में हुई छुरेबाज़ी की घटनाएं हैं.
चीन का कहना है कि शिनजियांग में 'हिंसक आतंकवादी गतिविधियों' से निपट रहा है.
जिनेवा में एक संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में चीनी अधिकारी हू लियानहे ने कहा था कि दस लाख लोगों को हिरासत में रखे जाने की बात 'कोरा झूठ' है.
हाल ही में चीन के मानवाधिकार विभाग के एक अधिकारी ने कहा है, "आप कह सकते हैं कि ये तरीका सबसे उपयुक्त नहीं है लेकिन धार्मिक चरमपंथ से निपटने के लिए ऐसा किया जाना ज़रूरी है. क्योंकि पश्चिम के देश इस्लामी चरमपंथ से लड़ने में असफल हो गए हैं. बेल्जियम और पेरिस में हुए हमले, इसका सबूत हैं. पश्चिम इस विषय में असफल रहा है."
चीन अक्सर शिनजियांग पर कोई सार्वजनिक राय नहीं देता. साथ ही शिनजियांग में बाहरी लोगों और मीडिया के प्रवेश की पूरी तरह से नियंत्रित करता है.
दुनिया भर में वीगर समुदाय के प्रति चीनी रवैया की आलोचना बढ़ती जा रही है. लेकिन अब तक किसी भी मुल्क़ ने आलोचना भरे शब्दों से आगे कोई क़दम नहीं उठाया है.
अमरीका में कांग्रेस की चीनी मामलों की कमेटी ने ट्रंप प्रशासन से शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़ी कंपनियों और अधिकारियों पर पाबंदी लगाने की गुहार की है.
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है - "अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय को हिरासत में रखा जा रहा है. उनका टॉर्चर हो रहा है. उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं पर पाबंदी लगी हुई है. उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हर पहलू निगरानी में है."
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संगठन की नई प्रमुख मिशेल बेशलेट ने भी शिनजियांग में पर्यवेक्षकों को शिनजियांग में जाने देने की अनुमति मांगी है. चीन ने इस मांग को सिरे से ख़ारिज करते हुए ग़ुस्से का इज़हार किया है.

Monday, September 10, 2018

अचानक क्यों बदल दिए गए जम्मू-कश्मीर के पुलिस प्रमुख

जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को देर रात अचानक पुलिस प्रमुख डॉक्टर शेष पॉल वैद का तबादला करके राज्य में नए डीजीपी को तैनात किया गया. राज्य के नए डीजीपी का पद दिलबाग सिंह ने संभाला है.
दिलबाग सिंह इस समय कारागार महानिदेशक के पद पर हैं और उन्हें पूर्ण रूप से जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रमुख का पद नहीं दिया गया है.
दिलबाग सिंह जम्मू-कश्मीर में पहले भी कई अहम पदों पर रह चुके हैं. वर्ष 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी दिलबाग सिंह जम्मू-कश्मीर में इंटेलिजेंस चीफ़ के पद पर रहने के अलावा कई दूसरे अहम पदों पर भी रहे हैं.
पुलिस प्रवक्ता की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़, दिलबाग सिंह ने शुक्रवार को डीजीपी का पद संभालने के फ़ौरन बाद पुलिस अधिकारियों की एक बैठक बुलाई.
उन्होंने अधिकारयों के साथ की गई बैठक में जम्मू-कश्मीर में अमन बहाल करने पर ज़ोर दिया है. उन्होंने ये भी कहा है कि वह हमेशा पुलिस जवानों के पीछे चट्टान की तरह डटे रहेंगे.
एसपी वैद ने दिसंबर 2016 में जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी का पद संभाला था. वैद वर्ष 1986 के जम्मू-कश्मीर कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं.
पूर्व डीजीपी एसपी वैद के तबादले पर विश्लेषकों का कहना है कि वैद के अचानक तबादले के साथ कई चीज़ें जुड़ी हुई हैं.
मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि हाल ही में दक्षिणी कश्मीर में पुलिसकर्मियों के रिश्तेदारों का अपहरण भी एसपी वैद के तबादले की एक वजह रही है. हालाँकि, कई हलकों में ये भी कहा जा रहा है कि वैद के तबादले के पीछे सिर्फ़ एक ही वजह नहीं है.
कुछ दिन पहले पुलिस ने चरमपंथी संगठन हिज़बुल मुजाहिदीन के कमांडर रियाज़ नाइकू के पिता और अन्य चरमपंथियों के रिश्तेदारों को हिरासत में लिया था. इन लोगों को हिरासत में लेने के बाद हिज़बुल ने क़रीब 11 पुलिसकर्मियों के रिश्तेदारों और पुलिसकर्मियों का अपहरण किया था.
पुलिस ने अपहरण की घटनाओं के फ़ौरन बाद नाइकू के पिता को हिरासत से रिहा किया था और बदले में हिज़बुल ने भी उन सभी 11 लोगों को छोड़ दिया था जिनका अपहरण किया गया था.
उस दिन के बाद से जब ये ख़बरें मीडिया में आनी शुरू हो गईं कि वैद को डीजीपी के पद से हटाया जा रहा है तब एसपी वैद ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि इस तरह के तबादले मामूली बात हैं.
कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक खुर्शीद वानी कहते हैं कि वैद को इस तरह से हटाकर किसी दूसरे को डीजीपी बनाना एक बड़ा फ़ैसला है.
उन्होंने कहा, "ये पहली बार है जब डीजी का पद किसी को अस्थाई रूप से दिया गया है. एक तरफ़ जम्मू-कश्मीर में पंचायती और नगर पालिका चुनाव की घोषणा भी हो चुकी है. कश्मीर में चरमपंथ भी काफ़ी बढ़ गया है तो ऐसे मौके पर अचानक डीजीपी को बदलने का फ़ैसला एक बड़ा फ़ैसला है."
जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल से लेकर प्रशासन और पुलिस में लगातार तब्दीलियां हो रही हैं. विश्लेषक इन तब्दीलियों को एक साधारण तरीके से देखने को तैयार नहीं हैं.
खुर्शीद वानी मानते हैं कि ये सब बदलाव केंद्र सरकार के कहने पर हो रहे हैं.
वह कहते हैं, "चूँकि जम्मू-कश्मीर में सिविल सरकार नहीं है और ज़ाहिर है कि इन सब तब्दीलियों का फ़रमान दिल्ली से जारी किया जा रहा है. इसका मक़सद क्या है उसकी तस्वीर साफ़ नहीं है."
कहा ये भी जा रहा है कि एसपी वैद ने कई मामलों पर राज्यपाल हाउस और केंद्रीय गृह मंत्रालय के सामने अपना विरोध दर्ज किया था जिस विरोध को शायद पसंद न किया गया हो.
वानी कहते हैं कि एसपी वैद ने कई मुद्दों पर हाल ही में अपनी राय ज़ाहिर की थी जो राय राज्यपाल हाउस और दिल्ली में गृह मंत्रालय में पसंद नहीं की गई हो.
वह कहते हैं, "दरअसल हाल ही में जो आर्टिकल 35-ए के हवाले से उन्होंने बयान देकर कहा था कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को राज्य के विशेष दर्जे के हवाले से अपने-अपने विचार हैं. और जब विरोध प्रदर्शन हुए थे तो उन्होंने कहा था कि प्रदर्शन करना हर एक का हक़ है. यह भी हो सकता है कि एसपी वैद ने कुछ चीज़ें राज्यपाल हाउस और गृह मंत्रालय के साथ क़ानून के हवाले से उभारी हों. मुझे लगता है कि इस तबादले का सम्बन्ध इस बात से भी है कि राज्यपाल आवास तेज़ी के साथ चुनाव कराने का काम कर रहा है और चरमपंथ बढ़ने से भी हो सकता है."
"कश्मीर में बीते एक दशक में पहली बार 300 चरमपंथी सक्रिय हैं. मुझे लगता है कि ऐसे मामलों पर डीजीपी को वो क़ामयाबी हासिल नहीं हुई थी जो केंद्र सरकार चाहती थी. लेकिन ये सही है कि बीते दो वर्षों में वैद की चरमपंथ के ख़िलाफ़ अभियानों में काफी भूमिका रही है. लेकिन हाल ही में जो दक्षिणी कश्मीर में पुलिसकर्मियों के रिश्तेदारों का अपहरण हुआ और जिस तरीक़े से वैद ने उसको हैंडल किया, मुमकिन है कि वो पसंद न किया गया हो."
एसपी वैद के तबादले और उनके कार्यकाल पर वानी कहते हैं, "वैद के तबादले के हवाले से कई विवादित बातें कही जा रही हैं. पहली बात तो ये कि चरमपंथियों के रिश्तेदारों को छोड़ दिया गया, जो स्थिति डीजीपी के हक़ में नहीं गई. ये भी कहा जा रहा है कि कठुआ घटना पर क्राइम ब्रांच को वैद का काफ़ी समर्थन रहा. ये कहा जा सकता है कि वैद का कार्यकाल मिली-जुली गतिविधियों से भरा रहा लेकिन डीजीपी का अचानक तबादला कहीं न कहीं यहां के हालात के साथ ज़रूर जुड़ा हुआ है. ऐसे में अब, जब चुनाव की बातें राज्य में की जा रही हैं, उस हवाले से इस फ़ैसले का उसमें बड़ा दख़ल होगा."
विश्लेषक और पत्रकार अहमद अली फ़याज़ कहते हैं कि जब सरकारें बदलती हैं तो अधिकारी भी बदल जाते हैं.
वह कहते हैं कि बीजेपी और पीडीपी का गठबंधन टूटने के बाद जम्मू-कश्मीर में बहुत ही अहम पदों पर नए चेहरे लाए गए हैं.
वह कहते हैं, "महबूबा मुफ़्ती की सरकार गिरने के बाद कुछ समय तक एनएन वोहरा राज्यपाल रहे. उस दौरान राज्य में जो चीफ़ सेक्रेटरी बीबी व्यास थे उनको एडवाइजर बनाया गया और उनकी जगह ख़ाली हो गई. उनको हटाकर छत्तीसगढ़ के एक आईएएस अधिकारी को लाया गया. उन्होंने अपने हिसाब से एक नई टीम का गठन करना शुरू किया. अब जो डीजीपी का तबादला हुआ ये एक अहम पद होता है और इस सारे मामले में जो बहुत ही अहम बात है वह ये कि एसपी वैद जम्मू-कश्मीर के नागरिक हैं."
"इससे पहले भी जम्मू के प्रंचराज शर्मा चीफ़ सेक्रेटरी थे तो उनको भी हटाया गया और दिल्ली भेजा गया. अब एसपी वैद को भी बीजेपी सरकार में ही डीजीपी पद से हटाकर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बनाया गया. इस बात को लेकर जम्मू के कई हलकों में खासकर जो कांग्रेस के लोग हैं, वे लोगों को ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि बीजेपी जम्मू के हित की सुरक्षा के खोखले दावे कर रही है. इसमें भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी रस्साकशी चल रही है. अब जो नए डीजीपी लाए गए हैं, वो भी जम्मू-कश्मीर के नागरिक नहीं हैं."
अली फ़याज़ का ये भी कहना है कि कठुआ घटना में वैद महबूबा मुफ़्ती की लाइन पर चलकर दोषियों को सख़्त सज़ा देने के हक़ में थे.

Friday, September 7, 2018

苏门答腊因红毛猩猩受谴责

据一项新的研究显示,由于对非法动物贸易的执法不力,印度尼西亚苏门答腊岛的红毛猩猩和长臂猿的生存受到威胁。根据野生动物贸易检测网“交易”,极度濒危动物红毛猩猩主要由于宠物交易而被捕捉,其捕捉数量已超过了20世纪70年代的水平。

据报道,被送到康复中心的红毛猩猩与长臂猿的记录可以显示这些动物有多少被非法拥有。被当做宠物养的红毛猩猩年龄和体型变得过大之后,最终被送到这样的康复中心。估计近三十年内印尼有2000只猩猩被查收或被私主上交,但是几乎没有人因此被成功起诉。

根据东南亚交易报道的作者文森特 ·纳吉曼所说:“成百上千的红毛猩猩和长臂猿生活在这样的中心里,而且每年还要增加几十个,我们不得不把这个数据看作是揭示印度尼西亚执法工作不利的证据。”

这项研究建议调查野生动物交易的根本原因,并更好的实施法律以保护红毛猩猩、长臂猿和苏门答腊岛的其他野生动物。尽管为动物保护的投资相当可观,但野生动物的数量仍然持续下降。最新估测苏门答腊只有7300只红毛猩猩幸存。

“交易”是环保组织世界自然基金会和国际自然与自然保护联合会的一个联合项目。
据《新科学家》援引环保组织——世界自然基金会研究结果的报道称,大量的鱼被浪费,不是因为它们是非目标鱼种却被意外捕获,就是因为捕渔船队没有尽力对它们进行记录和持续控制。据世界自然基金会的研究估算,每年至少有3850万吨的鱼被浪费,大约占总捕获量的40.4%。

世界自然基金会表示,这项国际性研究加强了要彻底改变关于如何管理捕渔业的需要,使所有从海洋捕捞物都被计算在内。同时还需要一个清晰并一致的关于意外捕获的新定义,去避免现存的记录和计算“被浪费鱼”不一致的情况。

据该研究作者,世界自然基金会国际部的罗宾·戴维斯说,“我们希望看到每件事采取某些措施来管理,以确保我们正在可承受的限度内捕渔。”戴维斯建议,意外捕获必须不仅要包括那些没用而被丢弃的鱼,还要包括被捕获但不是现阶段因物种濒临灭绝而受监控的鱼。

戴维斯分析了从 年到2003年公共渔业数据,该数据覆盖了44个国家,两个大洋地区(大西洋的西北部地区,地中海和黑海地区)和全球金枪鱼和鲨鱼鳍捕渔业。其中在鲨鱼鳍上的浪费是最为可观的,92%的非目标鱼种通常被丢弃了。

另外意外捕获的定义也存在不一致。一些国家认为,非目标捕鱼是可以被允许的。举例来说,亚洲捕虾业的船主会支付甲板手薪水去进行意外捕获。

Tuesday, September 4, 2018

大部分服装产品残留有毒有害物质

你恐怕想不到,你身上穿的衣服,尽管也许是知名的大品牌,但很可能残留着危害环境和健康的有毒有害物质。
8月23日,绿色和平发布了《毒隐于衣— 报告。在这份报告中,绿色和平指出许多国际国内知名品牌的服装产品中含有“环境激素”壬基酚聚氧乙烯醚( )。
“在阿迪达斯和李宁等运动品牌标榜健康生活方式的广告背后,其实是肮脏的排污管。损害环境和人体健康的壬基酚聚氧乙烯醚(NPE)正在被排放到中国的河流里,通过食物链威胁更多人的健康,”绿色和平污染与防治项目主任张凯说。
2011年4月至5月间,绿色和平在中国、英国、阿根廷等全球18个国家采购了15个服装品牌的78件样品,其中包括运动服装、休闲服装及鞋类。这些样品的产地涉及中国、孟加拉国、印度尼西亚、斯里兰卡、泰国等13个纺织品生产国。绿色和平将这些样品送至具有资质的第三方实验室进行检测,结果表明,包括阿迪达斯、李宁等在内的2/3的样品被检测出含有NPE。
 在纺织生产中常被用作表面活性剂,被排放到环境中会迅速分解成壬基酚(NP)。NP是一种公认的环境激素,它能模拟雌激素,对生物的性发育产生影响,并且干扰生物的内分泌,对生殖系统具有毒性。同时,NP能通过食物链在生物体内不断蓄积,因此研究表明,即便排放的浓度很低,也极具危害性的。
在绿色和平对不同服装检测出来的残留物质数据中,从27000毫克/千克到1.2毫克/千克不等。张凯介绍,如H&M、Adidas、Puma等大品牌对其产品中的NPE及NP含量已有所规定。但是,张凯强调:“‘洗’不是办法。如果不能从源头淘汰这些有毒有害物质,‘洗’只能加大对于生产国的污染。”
“纺织行业完全可以淘汰这类有毒有害物质,并最终消除这类物质对中国江河的威胁。” 张凯说。一些国际品牌在自己国家早已禁止了这些有毒有害物质的使用,但是在中国生产地却未加以禁止。 和NP已被列入《中国严格限制进出口的有毒化学品目录(2011)》,但生产中仍存在限用政策的缺失,绿色和平呼吁政府尽快出台法规限制包括NPE和NP等环境激素的使用,张凯介绍。
在绿色和平于2011年7月发布调查报告《时尚之毒—全球服装品牌的中国水污染调查》之后的两周,彪马做出在2020年前淘汰其供应链中的所有有毒有害物质的承诺,并且将在八周内制订出一份公开的行动计划;而耐克也在上周做出“去毒”承诺,并且会向公众公开使用和排放有毒有害物质的信息。
阿迪达斯和李宁等运动品牌标榜健康生活方式的广告背后,其实是肮脏的排污管。损害环境和人体健康的壬基酚聚氧乙烯醚(NPE)正在被排放到中国的河流里,通过食物链威胁更多人的健康,”绿色和平污染与防治项目主任张凯说。
2011年4月至5月间,绿色和平在中国、英国、阿根廷等全球18个国家采购了15个服装品牌的78件样品,其中包括运动服装、休闲服装及鞋类。这些样品的产地涉及中国、孟加拉国、印度尼西亚、斯里兰卡、泰国等13个纺织品生产国。绿色和平将这些样品送至具有资质的第三方实验室进行检测,结果表明,包括阿迪达斯、李宁等在内的2/3的样品被检测出含有NPE。
NPE在纺织生产中常被用作表面活性剂,被排放到环境中会迅速分解成壬基酚( )。 是一种公认的环境激素,它能模拟雌激素,对生物的性发育产生影响,并且干扰生物的内分泌,对生殖系统具有毒性。同时,NP能通过食物链在生物体内不断蓄积,因此研究表明,即便排放的浓度很低,也极具危害性的。
在绿色和平对不同服装检测出来的残留物质数据中,从27000毫克/千克到1.2毫克/千克不等。张凯介绍,如H&M、Adidas、Puma等大品牌对其产品中的NPE及NP含量已有所规定。但是,张凯强调:“‘洗’不是办法。如果不能从源头淘汰这些有毒有害物质,‘洗’只能加大对于生产国的污染。”
“纺织行业完全可以淘汰这类有毒有害物质,并最终消除这类物质对中国江河的威胁。” 张凯说。一些国际品牌在自己国家早已禁止了这些有毒有害物质的使用,但是在中国生产地却未加以禁止。NPE和NP已被列入《中国严格限制进出口的有毒化学品目录(2011)》,但生产中仍存在限用政策的缺失,绿色和平呼吁政府尽快出台法规限制包括NPE和NP等环境激素的使用,张凯介绍。
在绿色和平于2011年7月发布调查报告《时尚之毒—全球服装品牌的中国水污染调查》之后的两周,彪马做出在2020年前淘汰其供应链中的所有有毒有害物质的承诺,并且将在八周内制订出一份公开的行动计划;而耐克也在上周做出“去毒”承诺,并且会向公众公开使用和排放有毒有害物质的信息。

Thursday, August 30, 2018

यूपीः मुरादनगर में फोटोस्टेट कराने गई छात्रा से गैंगरेप, आरोपी फरार

त्तर प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. आए दिन महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही हैं. ताजा मामला गाज़ियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र का है. जहां फोटोस्टेट कराने गई एक छात्रा के साथ तीन युवकों ने खेत में लेजाकर सामूहिक बलात्कार किया.
वारदात मुरादनगर थाना क्षेत्र के रिहन्द गांव की है. जहां से 16 वर्षीय छात्रा नेकपुर गांव के करीब फोटोस्टेट कराने गई थी. बुधवार देर शाम जब वह घर लौट रही थी. तभी 11वीं की उस छात्रा को बाइक सवार तीन युवक जबरन एक खेत में खींचकर ले गए. जहां उन्होंने उस लड़की के साथ बलात्कार किया.
रेप की घटना के बाद आरोपी जाते-जाते लड़की को धमकी देकर गए कि अगर उसने इस बारे में किसी को कुछ भी बताया तो अंजाम बुरा होग. यह सुनकर डरी-सहमी छात्रा किसी तरह से अपने घर पहुंची और परिजनों को आपबीती सुनाई. उसकी बात सुनकर घरवाले सकते में आ गए.
छात्रा के साथ बलात्कार की ख़बर गांव में आग की तरह फैल गई. ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित किशोरी को मेडिकल जांच के लिए भिजवाया. बताया जा रहा है कि बलात्कार करने वाले आरोपी किशोरी के गांव के ही रहने वाले हैं.
पीड़ित छात्रा के परिजनों ने संबंधित थाने में जाकर रेप का मामला दर्ज करा दिया है. पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है. घटना के बाद से नाबालिग पीड़िता काफी सहमी हुई है.
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछली अखिलेश सरकार के दौरान 'समाजवादी पेंशन योजना' में बड़े घोटाले की बात उठाई है. यह बात विधानसभा सत्र के दौरान सामाजिक कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने एक सवाल के जवाब में कही.
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता नरेंद्र वर्मा ने सरकार से इस बाबत जानकारी मांगी. वर्मा ने पूछा कि क्या बीजेपी सरकार में समाजवादी पेंशन को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है? इस पर योगी सरकार की तरफ से मंत्री रमापति शास्त्री ने जवाब देते हुए कहा कि समाजवादी पेंशन योजना इसलिए बंद की गई क्योंकि इस स्कीम में भारी धांधली की गई. शास्त्री ने कहा, करीब 4 लाख लोग ऐसे थे जिन्हें बगैर नियम पेंशन दी जा रही थी.
समाज कल्याण मंत्री ने विधानसभा में बताया कि कुल 50 लाख लोगों को हर साल समाजवादी सरकार के दौरान पेंशन दी गई. इनमें से 4 लाख लोग ऐसे थे जो किसी रूप में पेंशन पाने लायक नहीं थे. यही नहीं, 43000 लोग ऐसे थे जो पेंशन पा रहे थे लेकिन जीवित नहीं थे. सरकार के मुताबिक तमाम दूसरी कमियां भी पाई गईं, इसलिए स्कीम को को बंद किया गया है.
गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी को 2012 के विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने में समाजवादी पेंशन योजना का अहम रोल था. इस योजना के तहत करीब 50 लाख लोगों को समाजवादी पेंशन दी गई थी. इन 50 लाख लोगों में से 22 लाख लोग OBC, 10 लाख लोग मुस्लिम और 4 लाख लोग अगड़ी जातियों के भी थे. इन्हें हर महीने 500 रुपए की पेंशन दी जाती थी और यह राशि हर साल 50 रुपए बढ़ा दी जाती थी. 2017 में जब बीजेपी की सरकार सत्ता में आई, तो समाजवादी पेंशन को लेकर जांच के आदेश दिए गए. तब से यह योजना बंद है. 

Monday, August 27, 2018

चीन : टैक्सी में रेप और हत्या, डीडी चूशिंग की सेवा स्थगित

चीन में टैक्सी सेवा देने वाली कंपनी डीडी चूशिंग एक बार फिर विवाद में है.
पुलिस के मुताबिक डीडी चूशिंग के एक ड्राइवर ने एक महिला यात्री के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी.
ये आरोप सामने आने के बाद कंपनी ने अपनी कार पूल सेवा को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया है.
कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस घटना से ज़ाहिर होता है कि सेवा प्रक्रिया में कुछ ख़ामियां हैं और इसलिए वो पुनर्मूल्यांकन के लिए अपनी हाइटेक सेवा को बंद कर रही है.
चीनी अधिकारियों के मुताबिक जिस महिला की हत्या की गई वो 20 साल की थीं और उन्होंने वेनजो शहर में शुक्रवार को टैक्सी सेवा ली थी.
कंपनी ने अपने बयान में कहा है, "इस घटना से ज़ाहिर है कि हमारी उपभोक्ता सेवा प्रक्रिया में कई ख़ामियां हैं. ये घटना ख़ामी की बहुत बड़ी क़ीमत है."
कंपनी ने डीडी हाइटेक के वाइस प्रेसिडेंट को भी बर्ख़ास्त कर दिया है.
अब से कुछ महीने पहले भी ऐसी ही घटना हो चुकी है.
मई के महीने में चीन के जंगजो में एक 21 साल की फ्लाइट अटेंडेंट ने टैक्सी सेवा ली थी और उनकी भी मौत हो गई थी. इसके बाद कंपनी ने अपनी सेवा को कुछ वक़्त के लिए स्थगित किया था और इसका नाम बदलकर डीडी हाईटेक कर दिया था.
पुलिस के मुताबिक हालिया घटनाक्रम में महिला शुक्रवार को स्थानीय समय के मुताबिक दोपहर एक बजे टैक्सी में सवार हुईं. एक घंटे बाद उन्होंने अपने एक मित्र को मैसेज भेजकर मदद मांगी. इसके बाद उनसे संपर्क टूट गया.
पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में शनिवार सुबह 27 बरस के ड्राइवर जूंग को गिरफ़्तार किया. पुलिस के मुताबिक उसने बलात्कार और हत्या करने की बात क़बूल की है.
पुलिस की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि महिला का शव बरामद कर लिया गया है और जांच जारी है.
डीडी चूशिंग ने बताया है कि जूंग का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. लेकिन कंपनी ने ये बात मानी है कि पहले भी उसे इस ड्राइवर के ख़िलाफ़ शिकायत मिली थी.
एक यात्री ने आरोप लगाया था कि ड्राइवर उन्हें सुनसान जगह पर ले गया और कार से उतरने के बाद उसने उनका पीछा किया.
डीडी चूशिंग यात्री ट्रिप के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है. रिपोर्टों के मुताबिक बीते तीन साल में ये एक अरब से ज़्यादा ट्रिप कर चुकी है.
ये कंपनी कार मालिकों और यात्रियों के बीच पुल का काम करती है यानी उनके बीच संपर्क स्थापित कराती है.
साल 2016 अमरीका की एप आधारित टैक्सी सेवा उबर ने अपना स्थानीय कारोबार डीडी के हवाले कर दिया था. उबर चीन में लाभ कमाने में नाकाम साबित हुई थी.

Thursday, August 16, 2018

欧盟为何应该封杀全球最畅销除草剂?

如今,草甘膦除草剂在欧盟乃至全球正面临着巨大争议。28个欧盟成员国就是否应该批准使用这种产品产生了严重分歧——最终结果将于本周晚些时候在布鲁塞尔揭晓。

上世纪70年代早期,跨国农业化学品公司孟山都成功开发并推出了这款除草剂。从那时起,草甘膦逐渐成为了全球使用最广泛的除草产品,而且一直以来都宣称是安全性最高的一种除草剂。制造商甚至表示,你要是想喝一口也完全没有问题。

草甘膦的主要用途是农业除草,但是随着转基因农产品的不断扩张,草甘膦的用途也变得多了起来。比如在非农业环境中,人们会用一种叫做“
农达()”的草甘膦产品来清理大街和人行道上的杂草,许多业余园丁也经常使用草甘膦。

多年以来,关于草甘膦影响人体健康的担忧也越来越多。早在上世纪80年代业内就有研究指出,草甘膦可能会引起实验动物先天缺陷。

美国环境保护署(,简称EPA)1985年发表的一篇关于草甘膦的报告显示,草甘膦可能与癌症以及肾损伤等病症有关。阿根廷转基因大豆产区使用了大量的草甘膦,而该地区农户家庭超乎寻常的先天缺陷、癌症以及肾脏疾病发病率似乎也印证了美国环境保护署的说法。

尽管各大厂商和政府机构支持者一再强调草甘膦是安全的,但是关于该物质的争议却丝毫没有减退之势。2015年3月,世界卫生组织(World Health Organisation)下属国际癌症研究局(International Agency for Research on Cancer,简称IARC)将草甘膦认定为“可能的致癌物质”。此外他们还特别指出,接触草甘膦与非霍奇金淋巴瘤有非常密切的关系。

国际癌症研究局(IARC)的声明和分类令草甘膦行业在欧洲的处境雪上加霜,因为欧盟方面正准备在2016年6月前对草甘膦的使用授权范围进行更新。

欧盟议会委员会原定在5月19日完成再度授权投票。不料本周发布的一项关于草甘膦的科研结果被认为漏洞百出,且为各方的利益博弈所左右,所以这种化合物的健康影响陷入了更大的争议之中。

通过投票,人们将重新评估草甘膦的安全性,不过最终决议还是要看对草甘膦本身潜在风险的科学评估结果。没有获得批准,任何人不得在欧盟成员国内使用、销售和贮藏草甘膦。

过去这些年里,公众对草甘膦和其他一些农药产品,以及人们在日常生活中接触到的这类化学物质总量越来越担心。

2013年,地球之友(Friends of the Earth)发布的一项研究显示,18个欧盟国家中,有44%的受访人群尿液中都检验出草甘膦成分。

在美国,另一项研究显示,草甘膦不仅出现在尿液中,母乳和血液样本中同样能够找到它的踪迹。

而近来一项针对欧盟议会成员的检测显示,所有测试者的尿液中都含有草甘膦成分。说来也巧,此项检测恰逢欧盟讨论是否颁布草甘膦禁令之时。

农药行动联盟(英国)(Pesticide Action Network UK)2014年早期的一份报告显示,食物中出现草甘膦残留其实一点都不奇怪,面包和小麦类产品尤其如此。

食物不过是人类接触草甘膦的众多途径之一,却已经引起欧盟民众极大的担忧。民调显示,有大概三分之二的欧盟民众反对使用草甘膦。

草甘膦的支持者以为2016年3月的审批不过是走过场,草甘膦将再度获批、未来15年可以在欧盟范围内继续大行其道。然而,这次审批最终变成了他们的噩梦。

最初决议原定是在2016年3月出台,但包括法国、荷兰和德国在内的欧盟国家却对再度授权表示了反对,这也就意味着欧盟委员会不一定能以多数票通过对草甘膦的再度授权。

因此,投票被延迟到了本周进行。这次延迟以及一些成员国家的担忧使得欧盟议会也开始对这件事情表示出了兴趣,并在4月13日达成一项动议,就自己对草甘膦的看法表明了立场。

欧盟议会在动议中没有要求发布全面禁令,但陈述了除草剂授权方面应该出现的一些主要变化。

这其中就包括:禁止向公众销售草甘膦;禁止在公共区域使用草甘膦;将授权时长从15年缩减到7年。

虽然欧盟议会的动议无法对欧盟委员会形成约束,但欧盟议会议员的最终决定将真实反映欧盟民众对禁止使用草甘膦的意愿。

任何没有涵盖欧盟议会提出的措施的授权实际上都是在破坏欧盟整体的民主进程。

很难预计投票最终会产生什么样的结果。

法国禁令

欧盟委员会必须要提出一个新的草甘膦提案,虽然提案尚未公布,但是几个成员国的反对立场却仍旧保持不变。比如法国就明确表示,不管投票结果如何,都将在法国全境禁止使用草甘膦。

由于担心草甘膦和其他农药对人类健康和环境的负面影响,如今已经有越来越多的欧盟乡镇和城市开始对上述农业化工产品发出禁令。仅法国就有400个无农药乡镇和城市,其中就包括巴黎。近来,西班牙的一些地区也开始了禁止使用草甘膦的运动,巴塞罗那就在其中。这种趋势应该会持续发展下去。

全球影响

欧盟一旦实行草甘膦禁令,那么将在全球范围内造成一系列复杂的影响。对于想要向欧盟出口产品的国家和企业来说,他们必须确保产品中不能检测出草甘膦残留。

为了保证出口,其他含草甘膦的农药当然也不能继续使用了。此外,这可能还会对转基因农作物的发展产生严重影响。草甘膦一直与转基因农作物,以及世界各地、特别是南北美洲许多使用
农达的农产品有着紧密联系。

可疑之处

本周一切仍将继续,而且局势可能会变得更加明晰。无论发生什么,有一点我们可以肯定——公众不想再使用草甘膦了,而且所有农药都已经被贴上了疑似危害健康的标签。

是时候告别旧式的重化学品农业了,我们应该在农业领域积极创新。也不要再使用战后那些有毒的化学品了,未来我们应该与大自然进行合作,而不是总想着要驯服大自然或者让大自然向我们投降。

编者注:5月19日,欧盟议会环境委员会再次投票延迟了这项决议的出台时间。如果没有进行后续投票,欧盟地区的草甘膦使用授权将于6月底正式失效。